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Bihar News: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बिहार समेत देशभर में मेडिकल स्टोर बंद, 12.5 लाख दुकानें रहेंगी प्रभावित

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ऑनलाइन दवा बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में बिहार समेत देशभर के केमिस्ट संगठनों ने 24 घंटे के बंद का ऐलान किया है। बिहार में 40 हजार और देशभर में करीब 12.5 लाख दवा दुकानें बंद रहेंगी।

पटना/आलम की खबर: ऑनलाइन दवा बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में बिहार समेत देशभर के केमिस्ट संगठनों ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। राज्यभर के दवा दुकानदारों ने 24 घंटे के बंद का ऐलान किया है, जिसके तहत शनिवार रात 12 बजे से रविवार रात 12 बजे तक मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। इस आंदोलन का असर केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में लाखों दवा दुकानें बंद रहने का दावा किया गया है। हालांकि मरीजों की आपात जरूरतों को देखते हुए कुछ आवश्यक मेडिकल स्टोर खुले रखने का निर्णय भी लिया गया है।

दवा कारोबार से जुड़े संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बिना पर्याप्त नियंत्रण के दवाओं की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे पारंपरिक दवा व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ रहा है। साथ ही मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बिहार में 40 हजार से अधिक दुकानें रहेंगी बंद

Bihar Chemist and Druggist Association के अनुसार राज्य में करीब 40 हजार मेडिकल स्टोर इस बंद में शामिल होंगे। इनमें राजधानी पटना की लगभग सात हजार दवा दुकानें भी शामिल हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह आंदोलन केवल कारोबार बचाने के लिए नहीं बल्कि मरीजों की सुरक्षा और दवा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

देशभर में करीब साढ़े 12 लाख मेडिकल स्टोर बंद रहने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आगे आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

ऑनलाइन दवा बिक्री पर उठाए सवाल

केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी छूट और ऑफर देकर पारंपरिक मेडिकल स्टोर के कारोबार को प्रभावित कर रही हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवा खरीदने की प्रक्रिया में कई बार नियमों की अनदेखी होती है।

संगठन के अनुसार कई मामलों में एक ही डॉक्टर की पर्ची का बार-बार उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा फर्जी और अप्रमाणित प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर भी दवाएं उपलब्ध कराए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। दवा दुकानदारों का कहना है कि यह स्थिति मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

एंटीबायोटिक और नारकोटिक दवाओं को लेकर चिंता

एसोसिएशन ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से एंटीबायोटिक और नारकोटिक दवाओं की आसान उपलब्धता एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना चिकित्सकीय निगरानी के ऐसी दवाओं का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट मरीज को दवा के इस्तेमाल, खुराक और सावधानियों के बारे में जानकारी देते हैं, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह संवाद लगभग खत्म हो जाता है। इससे गलत दवा लेने या दवा के दुष्प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है।

AI आधारित फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का आरोप

केमिस्ट संगठनों ने दावा किया है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी पर्चियां तैयार कर दवाएं खरीदी जा रही हैं। उनका कहना है कि यह नई चुनौती स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

संगठन के अनुसार यदि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में मरीजों की सुरक्षा से समझौता हो सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी वही नियम लागू किए जाएं जो पारंपरिक मेडिकल दुकानों पर लागू होते हैं।

नकली दवाओं और गलत स्टोरेज का खतरा

दवा दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कई बार दवाओं के स्टोरेज और गुणवत्ता को लेकर पर्याप्त निगरानी नहीं हो पाती। इससे नकली या गलत तरीके से रखी गई दवाओं का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई दवाओं को निश्चित तापमान और सुरक्षित वातावरण में रखना जरूरी होता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो दवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिसका असर सीधे मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ने की आशंका

केमिस्ट संगठनों ने चेतावनी दी है कि बिना नियंत्रण के एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री से एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्या तेजी से बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि भविष्य में कई दवाएं मरीजों पर असर करना बंद कर सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि एंटीबायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल बढ़ता रहा तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए दवाओं की बिक्री में सख्त निगरानी और नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

मरीजों से पहले से दवा खरीदने की अपील

केमिस्ट संगठनों ने आम लोगों से अपील की है कि वे बंद से पहले अपनी जरूरी दवाएं खरीद लें ताकि किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि गंभीर मरीजों और आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ मेडिकल स्टोर खुले रखे जाएंगे।

संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशानी में डालना नहीं है, बल्कि सरकार का ध्यान उन समस्याओं की ओर आकर्षित करना है जो दवा कारोबार और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं।

सरकार से सख्त नियम लागू करने की मांग

दवा दुकानदारों ने मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए स्पष्ट और सख्त नियम बनाए जाएं। उनका कहना है कि यदि ई-कॉमर्स कंपनियों को बिना नियंत्रण के दवा बेचने की छूट दी गई तो इससे पारंपरिक दवा व्यवसाय के साथ-साथ स्वास्थ्य व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

संगठन ने सरकार से अपील की है कि मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऑनलाइन दवा बिक्री की व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए।

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